Short History Of Tehri

1/22/2018

                          टिहरी गढ़वाल का  शंक्षिप्त इतिहास  

History Of Tehri Garhwal
History Of Tehri

प्रस्तावना

टिहरी दो शब्दों से मिलकर बना है टिहरी और गढ़वाल।
यह त्रिहारी शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ है,, तीन तरह के पाप को धोने वाला और गढ़वाल का अर्थ है गढ़ अर्थात  किला। तीन नदियों से घिरे  रहने के कारण  इसका नाम टिहरी पड़ा, भागीरथी,भिलंगना और बालगंगा

इतिहास 

इतिहास के विषय मैं बात की जाये तो ८८८ ईसा पूर्व सम्पूर्ण गढ़वाल छोटी छोटी रियासतों मे विभाजित था।
इन्हे हम राणा राय या ठाकुर के नाम से जानते है।
माना जाता है ,की मालवा के राजकुमार कनकपाल एक बार बद्रीनाथ के दर्शन के लिए  आये यहां उनकी भेट राजा भानुप्रताप से हुई , राजा कनकपाल  से भानुप्रताप बहुत प्रभावित हुए और अपनी एक लोती  पुत्री का विवाह उनसे करवा दिया।
कनकपाल के शासन मे उन्होंने बहुत  से किले जेते और यही उनकी पीढ़ी ने भी जारी रखा ,और  इसी प्रकार उन्हीने अपनी रियासत का विस्तार किया। और ९१८ वर्ष के लबे अंतराल के बाद सम्पूर्ण गढ़वाल क्षेत्र इस रियासत के अधीन हो गया। इसके पश्चात् १८०३ मई  गोरखाओ ने गढ़वाल पर आक्रमण किया और युद्ध को जीत लिया।  और सम्पूर्ण गढ़वाल गोरखाओ के अधीन हो गया।  इसी प्रकार गोरखाओ का गढ़वाल पर प्रभुत्व बढ़ता चल गया और उन्होंने १२ वर्ष (१८०३ से १८१५) गढ़वाल  पर शाशन किया।
इसके बाद राजा सुदर्शन शाह ने ईस्ट इंडिया कंपनी की मदद से (सिंगोली की संधि  १८१५ )अपना गढ़वाल का शासन गोरखाओ से पुनः छीन  लिया था।  परन्तु धूर्त अंग्रेजो ने इसी संधि के बदले उस तत्कालीन गढ़वाल की राजधानी श्री नगर को और संपूर्ण अलकनंदा  के क्षेत्रों  को हड़प लिया। और कुमाऊ ,देहरादून और पूर्व गढ़वाल को इस क्षेत्र मैं मिला लिया था। और पश्चिमी गढ़वाल का टिहरी गढ़वाल और उत्तरकाशी क्षेत्र राजा सुदर्शन को दे दिया , और १८ दिसंबर १८१५ को राजा सुदर्शन ने टिहरी गढ़वाल को अपने क्षेत्र की राजधानी घोषित कर दिया।

राजा एवं उनका राजकाल 

१.     टिहरी वंश के प्रथम राजा राजा सुदर्शन थे , और परमार वंश के ५५वे राजा थे , जिन्हे गोरखाओ से युद्ध के  पश्चात सुरक्षित    कर लिया गया था,उस समय ये अल्पव्यस्क थे।  इनका जन्म १७८४ मैं हुआ था, और ये  १८१५ मैं राज गद्दी पर  बैठे, और १८५९ को इनकी मृत्यु हो गयी।
२.     इसके पश्चात् राजा सुदर्शन के पुत्र १८५९ मैं राजा बने और १८७१ में इनकी मृत्यु हो गयी।
३.    राजा प्रताप शाह तीसरे राजा थे इनका कार्यकाल १८७१ से १८१५ तक रहा। यह पहले राजा थे जिन्होंने  महिला शिक्षा से लोगो को अवगत कराया  ।
४.    चौथे राजा कीर्ति शाह थे इनका कार्यकाल १८८७ से १९१३ तक रहा।
५.    राजा नरेंद्र शाह पाँचवे राजा  थे , इन्होने १९१३ से १९४६ तक राज किया और बहुत चर्चित राजा रहे।
६.    छटवे राजा राजा मानवेन्द्र शाह थे , इनका जन्म २६ मई १९२१ को प्रताप नगर मैं हुआ था.  ये १९४६ से  २००७ तक राजा रहे।

राजा मानवेन्द्र शाह २००७ तक इसलिये राजा माने जाते है क्योंकि  ये टिहरी से २००७ तक संसद रह चुके है।आजादी के पश्चात राजा मानवेन्द्र शाह (परमार वंश के ६०वे राजा) ने भारत की रियासतों मैं विलय होने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया , और १ अगस्त १९४९ को उत्तर प्रदेश में  टिहरी को मिला लिया गया।
इसके पश्चात उत्तर प्रदेश सरकार  ने २४ फरवरी १९६० मैं इस तहसील को अलग करके एक उत्तरकाशी नाम का जिला बना दिया गया।

गढ़वाल की राजधानियाँ 

देवलगढ़            (१५००-१५१९ )
श्रीनगर              (१५१९-१८०४ )
टिहरी                (१८१५ -१८६२ )
परताप नगर      (१८६२-१८९०  )
कीत्र्तिनगर        (१८९०-१८५० )
 नरेंद्र नगर         (१९२५-१९४९ )


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